मैंने ‘वसीयत’ क्यों लिखी? मैंने ‘वसीयत’ इसलिए नहीं लिखी कि अपने पीछे कोई संपत्ति छोड़ जाऊँ— मैंने इसे इसलिए लिखा कि अपने भीतर संजोई भावनाएँ, अनुभव और संवेदनाएँ शब्दों में छोड़ सकूँ।

✍️ लेखक की कलम से मैंने ‘वसीयत’ क्यों लिखी? मैंने ‘वसीयत’ इसलिए नहीं लिखी कि अपने पीछे कोई संपत्ति छोड़ जाऊँ— मैंने इसे इसलिए लिखा कि अपने भीतर संजोई भावनाएँ, अनुभव और संवेदनाएँ शब्दों में छोड़ सकूँ। चिकित्सक के रूप में मैंने मनुष्य के शरीर को करीब से देखा है, और कवि के रूप में उसके मन की अनकही पीड़ा, प्रेम, विरह, रिश्तों और संघर्षों को महसूस किया है। ‘वसीयत’ मेरी उन्हीं अनुभूतियों की अभिव्यक्ति है। मेरे लिए यह केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि मेरे मन का वह अंश है, जिसे मैं पाठकों के नाम छोड़ना चाहता हूँ। शायद यही मेरी सबसे सच्ची वसीयत है— कुछ शब्द, कुछ एहसास और कुछ अनकही बातें।❤️📖 — डॉ. प्रवेश सिंह भदौरिया